# https://www.chubhan.today ## Posts - [ज़िन्दगी के ऑनलाइन सपने](https://www.chubhan.today/korean-love-game/): डॉ. सत्या सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, काउंसलर। 2011 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति माननीया प्रतिभा पाटिल जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से 2017 में उन्हें ‘देवी अवार्ड’ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सम्मानित किया। आपको सम्मान स्वरूप मिले मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कारों से एक कमरा भरा हुआ है। आप ताइक्वांडो चैंपियन भी हैं।   ऑनलाइन गेमिंग : मनोरंजन से लत, लत से अपराध तक का सफर : 3 फरवरी 2026 को रात करीब पौने दो बजे तीन नाबालिग सगी बहनों, निशिका (16 साल), प्राची (14 साल) और पाखी […] - [जहाँ सिर्फ कैलेंडर बदलता है](https://www.chubhan.today/jahan-sirf-calender-badalta-hai/): डॉ. सत्या सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, काउंसलर। 2011 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति माननीया प्रतिभा पाटिल जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से 2017 में उन्हें ‘देवी अवार्ड’ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सम्मानित किया। आपको सम्मान स्वरूप मिले मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कारों से एक कमरा भरा हुआ है। आप ताइक्वांडो चैंपियन भी हैं। न्यू ईयर का जश्न – शहर की सड़कों पर रंगीन बल्ब झिलमिला रहे थे। मॉल्स में “हैप्पी न्यू ईयर” के पोस्टर लगे थे, टीवी पर काउंटडाउन चल रहा था और लोग नए कपड़ों, नए सपनों […] - [माँ, थोड़े पैसे और चाहिए…](https://www.chubhan.today/maa-thode-paise-aur-chahiye/):   डॉ. सत्या सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, काउंसलर। 2011 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति माननीया प्रतिभा पाटिल जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से 2017 में उन्हें ‘देवी अवार्ड’ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सम्मानित किया। आपको सम्मान स्वरूप मिले मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कारों से एक कमरा भरा हुआ है। आप ताइक्वांडो चैंपियन भी हैं। शाम का समय था। रसोई में दाल उबल रही थी, और खिड़की के बाहर धूप आख़िरी साँसें ले रही थी। शांति थी…..पर वह शांति नहीं, जो सुकून दे….बल्कि वह शांति थी, जो किसी तूफ़ान […] - [अनकहे सवालों के बीच खड़ी दोस्ती](https://www.chubhan.today/ankahe-sawalon-ke-beech-dosti/):   डॉ. सत्या सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, काउंसलर। 2011 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति माननीया प्रतिभा पाटिल जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से 2017 में उन्हें ‘देवी अवार्ड’ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सम्मानित किया। आपको सम्मान स्वरूप मिले मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कारों से एक कमरा भरा हुआ है। आप ताइक्वांडो चैंपियन भी हैं। मेरी बात – दोस्ती कोई लिखित अनुबंध नहीं होती, न ही उसमें शर्तों की लंबी सूची होती है, फिर भी दोस्ती की अपनी एक नैतिक भाषा होती है, जिसमें भरोसा, सम्मान और संवाद सबसे […] - [जीव पर शिव की कृपा (सत्य अनुभूति)](https://www.chubhan.today/jeev-par-shiv-ki-kripa/):             – डॉ. नारदी जगदीश पारेख जीव की शिव के पास जाने की योजना – चातुर्मास याने जीव की शिव के पास जाने की योजना। जी हां देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक जीवन धीमे लेकिन स्थिर कदमों से उसकी ओर बढ़ता है। कृष्ण के हर वर्ष विवाह करने का कारण – अब सोचिए कि कृष्ण हर साल शादी क्यों करते हैं? यह एक गूढ़ प्रश्न है लेकिन इसका उत्तर स्वयं श्रीनाथजी ने दिया है वह जानकर भी मन रोमांचित हो उठता है! मेरा अपना अनुभव – आइए मैं आपसे बात करती हूं….12 दिसंबर 2004 […] - [साहित्य की अनमोल धरोहर : मृदुल कीर्ति जी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ](https://www.chubhan.today/mridul-kirti-ji-ko-janm-din-ki-shubhkamnaen/): आज, मृदुल कीर्ति जी, जो आधुनिक संस्कृत की पहचान हैं और न सिर्फ संस्कृत साहित्य अपितु हिंदी और ब्रजभाषा की भी विदुषी लेखिका है, उनका जन्म दिन है। देखिए एक अद्भुत संयोग…. उनका जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ और अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार उस दिन 7 अक्टूबर थी और इस वर्ष भी शरद पूर्णिमा 7 अक्टूबर को ही है। शरद पूर्णिमा के दिन जन्म का एक विशेष महत्व – शरद पूर्णिमा के पावन दिवस, मृदुल कीर्ति जी का जन्म होना मात्र एक संयोग नही है, अपितु इस दिन के साथ कुछ न कुछ तो ऐसा विशेष है कि इस […] - [नवरात्रि एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ](https://www.chubhan.today/navratri-evam-vijyadashmi/): आजकल हर तरफ उत्सवों का माहौल है,हम सभी नवरात्रि और दशहरा मना रहे हैं और फिर दीपावली मनाने की तैयारियां कर रहे हैं।सभी को नवरात्रि और दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।इन पर्व त्यौहारों की जो उमंग पहले हुआ करती थी,वह अब उतनी नहीं रही।आजकल इन अवसरों पर लोगों की सहभागिता कम होती जा रही है।इनका स्वरुप लोकोन्मुखी नहीं रहा है।मैं तो यही कहूँगी कि आज जीवन में राम को लाने की आवश्यकता है तभी दशहरा,दीपावली जैसे पर्व को सही मायने में प्रासंगिक बनाया जा सकता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम – नवरात्रि दशहरा और दीपावली इन सभी पर्वों का सम्बन्ध श्री […] - [भारत भूमि में माँ का महत्व और आज की स्थिति : नवरात्रि विशेष](https://www.chubhan.today/navratri-vishesh/):   कमल किशोर राजपूत “कमल” सूफी गीत “मेरे हद की सरहदें” प्रसिद्ध कबीर गायक पद्मश्री प्रह्लाद सिंह तिपनिया जी ने गाया। इंजीनियर, वरिष्ठ वैज्ञानिक – DRDO, निजी आई.टी. कम्पनी और शायर/कवि. 6 संग्रह गीतों, भजनों, गज़लों के। विश्व का एक ही देश है जहाँ पर सदियों से ’बरगदी सभ्यता’ अर्थात प्रकृति, मानव और सर्व प्राणियों के बीच समग्र समावेश को विशिष्ट महत्व दिया जाता रहा है, यहीं से आध्यात्मवाद के विश्वरूपी शाश्वत सत्य की नींव रखी गई। सनातन धर्म की पहचान – शाश्वत सनातन धर्म, कालान्तर में हिन्दू धर्म से पहचाना गया उसकी व्यवहारिक एवं मनोवैज्ञानिक सरलता में निहित गूढ़ता, […] - [आखिरी तर्पण](https://www.chubhan.today/akhiri-tarpan/):   डॉ. सत्या सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, काउंसलर। 2011 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति माननीया प्रतिभा पाटिल जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से 2017 में उन्हें ‘देवी अवार्ड’ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सम्मानित किया। आपको सम्मान स्वरूप मिले मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कारों से एक कमरा भरा हुआ है। आप ताइक्वांडो चैंपियन भी हैं।   वाराणसी के पास एक कस्बे में रहते थे रामकिशोर शुक्ला। जीवन ने उन्हें कभी सुख की थाली परोसकर नहीं दी, पर दुखों की भारी गठरी ज़रूर दी। बेटे के जन्म के बाद से […] - [हिंदी - दिवस : भाषा का दर्द और राष्ट्रभाषा का अभाव](https://www.chubhan.today/hindi-diwas-aur-rashtrabhasha-ka-abhav/):                   लेखक – अजय “आवारा” लीजिए, एक और “हिन्दी दिवस” आ गया। आज कार्यक्रम होंगे, बातें होंगी और कल से फिर वही ढाक के तीन पात। हर विचार कहीं धुंआ हो जाएंगे। हमारी एक राष्ट्रभाषा भी नहीं – हिंदी दिवस के दिन सबसे ज़्यादा चुभने वाली बात लगती है कि स्वतंत्रता के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी हमारे देश की एक राष्ट्रभाषा नही है, जबकि हमसे बहुत बाद में आज़ाद हुए देशों की भी एक राष्ट्रभाषा है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाषा के मामले में हम काफी पिछड़ गए […] - [लिव-इन रिलेशनशिप : व्यक्ति और समाज पर प्रभाव](https://www.chubhan.today/liv-in-relationship/): डॉ. सत्या सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, काउंसलर। 2011 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति माननीया प्रतिभा पाटिल जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से 2017 में उन्हें ‘देवी अवार्ड’ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सम्मानित किया। आपको सम्मान स्वरूप मिले मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कारों से एक कमरा भरा हुआ है। आप ताइक्वांडो चैंपियन भी हैं। आधुनिक भारतीय समाज निरंतर बदलते मूल्यों और जीवनशैली का गवाह है। जहाँ एक ओर पारंपरिक विवाह संस्था का आदर्श अब भी मज़बूती से कायम है, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी में लिव-इन रिलेशनशिप की प्रवृत्ति […] - [कान्हा की भक्ति के अनमोल रंग : जन्माष्टमी पर्व](https://www.chubhan.today/kanha-ki-bhakti-ke-anmol-rang/):   👆पूरे संवाद को वीडियो में सुनें और कृष्ण भक्ति में डूब जाएं। श्री कृष्ण युग युग के प्रतिनिधि – श्री कृष्ण युग-विशेष के प्रतिनिधि न होकर युग युग के प्रतिनिधि हैं। निसंदेह कहा जा सकता है कि भारतीय चिंतन धारा को सर्वाधिक प्रभावित यदि किसी ने किया तो वह श्रीकृष्ण और श्री राम के चरित्र ही हैं। डॉ. नारदी जगदीश पारेख जैसी विभूतियों ने इस चिंतन धारा को और भी गहरा और व्यापक बनाया है। आपने विपरीत परिस्थितियों में रहते हुए भी निरंतर अपना लेखन जारी रखा। जन्माष्टमी पर्व – जिन श्रीकृष्ण जी को भारतीय जीवन-दर्शन ने पूर्णावतार की […] - [आज का भारत : संघर्ष से स्वर्णिम भविष्य तक](https://www.chubhan.today/aaj-ka-bharat-sangharsh-se-swarnim-bhavishya/): 👆🏿ओज और जोश से भरी रचनाओं को सुनें और वीर रस में डूब जाएं। स्वतंत्रता का वरदान – भारत लंबी पराधीनता के बाद भारत को 15 अगस्त 1947 के दिन स्वतंत्रता का वरदान मिला। 15 अगस्त एक राष्ट्रीय अवकाश है। यह दिन प्रत्येक नागरिक को वीर स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किये गए बलिदान को याद करके मनाना चाहिए, जिन्होंने हंसते हंसते भारत माता के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान किया। कोई भी देश हो सभी के लिए स्वतंत्रता का बहुत मूल्य होता है। स्वतंत्रता, जो सभी देशवासियों को अपनी शर्तों पर जीने की सुविधा देती है, उन्हें वह सब कुछ […] - [शिव जी के रहस्यमयी प्रतीक और सावन मास की महिमा](https://www.chubhan.today/shiv-ji-ke-rahasyamayi-prateek-aur-sawan/):   कमल किशोर राजपूत ‘कमल’ जी इंजीनियर, वरिष्ठ वैज्ञानिक – DRDO, निजी आई.टी. कम्पनी और शायर/कवि. 6 संग्रह गीतों, भजनों, गज़लों के। सूफ़ी गीत प्रसिद्ध कबीर गायक पद्मश्री प्रह्लादसिंह तिपानिया जी ने गाया। भगवान शिव हिंदू जनमानस में एक अहम दैवीय उपस्थिति हैं। शिव क्या हैं, कौन हैं उनकी महिमा क्या है? शिव तो स्वयं काल हैं, महाकाल हैं, जो समय और सीमाओं के परे हो वही तो शिव हैं, वही तो भोले हैं। शिव का स्वरूप – सर्वप्रथम शिव का रूप-स्वरूप जितना रहस्यमयी और विचित्र है उतना ही आकर्षक भी। अगर इन्सान इन विषमताओं वाले देव को सिर्फ़ स्वीकार […] - [🎵 क्या संगीत के घराने इतिहास बन जाएंगे?](https://www.chubhan.today/kya-sangeet-ke-gharaane-itihaas/): लेखक परिचय छोटे राजा हर्षेन्द्र सिंह रियासत चंदापुर, रायबरेली एक स्वाध्यायी व्यक्तित्व, जिनके लेखन में गहराई और सच्चाई दिखती है और सबसे बड़ी बात कि इतना अध्ययन करते हैं वे विषय का कि एक-एक शब्द अपने मायने व्यक्त करता है। चन्दापुर रियासत और यहां से जुड़े संगीत सम्राट तानसेन के वंशजों के विषय में दुनिया अनभिज्ञ ही रह जाती, यदि हर्षेन्द्र सिंह जी के सत्प्रयास न होते। रियासतों के अंत के बाद सांस्कृतिक परंपरा का संघर्ष – शासकीय संरक्षण न होने तथा व्यापक सामाजिक सहयोग न होने के कारण वर्तमान में संगीत के घरानों के ऐसे उत्तराधिकारी जो संप्रति काल […] - [चाचाजी हैं न.....](https://www.chubhan.today/chachaji-hain-na/): हास्य और व्यंग्य की कला, एक ऐसा माध्यम है जो हमें जीवन की जटिलताओं को समझने और उन्हें हल्के में लेने का अवसर देता है। जब रचनाकार इस कला का उपयोग सामाजिक मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने और लोगों को जागरूक करने के लिए करते हैं, तो ये और भी प्रभावशाली हो जाती है। हास्य और व्यंग्य की चुभन – ऐसे रचनाकार जो हास्य और व्यंग्य का स्तर बनाकर चलते हैं, वे न केवल लोगों को हंसाते हैं, बल्कि उन्हें सोचने पर मजबूर भी करते हैं। लेकिन आज के समय में हास्य और व्यंग्य की परिभाषा बदल गई है। पहले […] - [चंदापुर : तानसेन की विरासत और एक भूली-बिसरी संगीत परंपरा की कहानी](https://www.chubhan.today/chandapurtansen-ki-virasat-aur-ek-bhuli-bisri/): ✍️ साहित्य और संस्कृति की धरती: चंदापुर लेखक परिचय छोटे राजा हर्षेन्द्र सिंह रियासत चंदापुर, रायबरेली। हर्षेन्द्र सिंह जी साहित्य, संस्कृति और कलाओं के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं। वे अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से हम सबको प्रेरित करते हैं और समाज को एक नई दिशा प्रदान करते हैं।   जनपद रायबरेली परम्परा से साहित्य और संस्कृति का पोषक रहा है, प्रेमाख्यानक काव्य परम्परा के उन्नायक मूल्ला दाऊद, भक्तिकालीन प्रेममार्गी शाखा का सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ पद्मावत के रचयिता मलिक मोहम्मद जायसी, आधुनिक हिंदी के सूत्रधार आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी आदि के साहित्य सृजन ने इस जनपद की धरती को साहित्यिक […] - [भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान: एक गहन चिंतन](https://www.chubhan.today/bhartiya-sanskrti-aur-parampar/): भारतीय संस्कृति पर गर्व: सम्मान और समर्पण भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना हमारा नागरिकता का प्रतीक है। यही हमारी विशेषता है कि हमारी संस्कृति ने समय के साथ अपनी महानता और समृद्धि को संरक्षित रखा है। हमें गर्व है अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर, जिसे हमने पीठ पीछे से उत्ताप किए बिना संजीवनी बना रखा है। लेकिन क्या हम इसी तरह से दूसरी संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान करते हुए भी अपनी पहचान का अपमान नहीं कर रहे हैं? हमारी पहचान और आत्मसम्मान आधुनिकता की दुनिया में, हमारी मानसिकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता […] - [स्वर्णज्योति : ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक](https://www.chubhan.today/swarna-jyoti-urja-aur-sakaratmkta/): “स्वर्ण ज्योति जी का साहित्यिक दीपक सदैव प्रकाश फैलाता रहेगा….. – कमल किशोर राजपूत ‘कमल’ <p><p>16 अक्टूबर को लखनऊ से भावना घई का अचानक फोन आया कि स्वर्ण ज्योति जी से मिल लें उन्हें अच्छा लगेगा। स्वर्ण ज्योति जी कैंसर जैसी घातक व्याधि की चौथी स्टेज से गुज़र रही थीं। भावना की बातों में भावनाओं का ज्वार उमड़ा हुआ था, अतएव मेरे संवेदनशील हृदय ने स्वर्ण ज्योति जी से मिलने का निश्चय किया, उन्हें फोन किया और उनसे मिलने पहुँच गए मित्र प्रेम तन्मय के साथ। किसे पता था वो उनसे आख़िरी मुलाक़ात होगी। स्वर्ण ज्योति जी मुझे अपना भाई […] - [तेलंगाना के जंगलों पर संकट : सिराजुद्दीन जी की चुभती चेतावनी](https://www.chubhan.today/telangana-ke-janghon-par-sankat/): विवाद का परिचय – हैदराबाद में 400 एकड़ में फैले कांचा गचीबावली जंगल को काट देने को लेकर बहुत विवाद उत्पन्न हो गया है,जिसमें पर्यावरण, राजनीति और कानून शामिल हैं। हमारे चुभन के दर्शक क्योंकि भली प्रकार जानते हैं कि हमारे साथ दक्षिण भारत से बहुत से विद्वान वक्ता जुड़े हुए हैं, इसलिए आज हमने चुभन के पटल पर तेलंगाना के वारंगल नगर से सिराजुद्दीन जी को आमंत्रित किया है। वारंगल को तेलंगाना की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। सिराजुद्दीन जी का दृष्टिकोण – सिराजुद्दीन जी एक लोकप्रिय कवि और साहित्यकार हैं, उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित भी हो चुकी […] - [नई करवट लेती नारी अस्मिता](https://www.chubhan.today/mahila-diwas-womens-day/): अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: नारी अस्मिता की नई पहचान की ओर एक कदम महिला दिवस: एक दिन क्यों? सवाल जो चुभते हैं आज “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” (International Women’s Day) है। मेरे ख्याल से किसी को भी बताने की ज़रूरत ही नही है क्योंकि प्रिंट मीडिया,सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जहाँ भी देखिये आज तरह-तरह के कार्यक्रम,सन्देश और शुभकामनाओं से भरे ऑफर हम सबको मिल जाएँगे। कल रात ही मुझे मेरी दोस्त ने बताया कि कई अस्पताल तो महिला दिवस पर महिलाओं के लिए फ्री चेक-अप कैंप लगा रहे हैं और भी कई तरह के सामानों पर बहुत सारे ऑफर…. नारी को […] - [हाइगा की दुनिया में सत्या सिंह जी की यात्रा](https://www.chubhan.today/haiga-ki-duniya-me-satya-ji-ki-yatra/): आप सभी डॉ. सत्या सिंह जी से भली भांति परिचित हैं। आपने जिन विषयों या जिन मुद्दों पर अपनी लेखनी उठाई, उनके बारे में यही कहना पड़ेगा कि आपके चिंतन को, आपके लेखन को नमन है। गहन-गंभीर विषयों पर उनके विचारों से हम आपको अवगत करवाते ही रहते हैं। आज उनका संवेदनशील कवयित्री वाला रूप आप सबके समक्ष प्रस्तुत करने का मन कर रहा है क्योंकि वहां भी आपको कुछ नया, कुछ सृजनात्मक देखने को मिलेगा। डॉ. सत्या सिंह जी ने “हाइकू” कविताएं लिखीं हैं और वह भी पूरे भाव के साथ….. कुछ शब्दों में ही पूरा अर्थ आपके समक्ष […] - [महाकुंभ: एक महापर्व की महिमा](https://www.chubhan.today/mahakumbh-ek-mahaparv-ki-mahima/): महाकुंभ: एक महापर्व, एक भावना — ‘चुभन’ के संग देशभर से जुड़े स्वर महाकुंभ एक महापर्व है, एक ऐसा पर्व, जिसमें देश, दुनिया, दूर पास कुछ रहा ही नही। हर व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, किसी न किसी रूप से इस महापर्व का हिस्सा बना ही। हमने भी “चुभन” से इस महापर्व पर कुछ कार्यक्रम प्रस्तुत किये। आज सुदूर दक्षिण के प्रदेश कर्नाटक से डॉ. श्रीलता सुरेश जी हमारे साथ होंगी, जिनसे आप सब परिचित ही हैं और उत्तर प्रदेश से अलका श्रीवास्तव जी हमारे साथ होंगी। आप दोनों से ही हमें महाकुंभ के बारे में कुछ रोचक जानकारी सुनने को […] - [ग्रीन हायड्रोजन : वरदान या अभिशाप](https://www.chubhan.today/green-hydrogen-vardan-ya-abhishap/): प्रकृति और हमारी संवेदनाएं प्रकृति से हमें अनंत कल्पनाएं और असीम प्रेरणाएं मिलती हैं, परंतु आज के रोबोटिक युग में शायद हमारी संवेदनाएं कहीं गुम होती जा रही हैं, तभी प्रकृति भी जैसे हमसे रूठती जा रही है। हम तो उस देश के वासी हैं जहां प्रकृति के कण-कण में हम एक चेतना, एक प्रवाह का अनुभव करते हैं लेकिन सच कहूं तो इस भाग-दौड़ भरी दुनिया में इतना संवेदनशीलता से सोचना भी जैसे भारी होता जा रहा है, फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं जो इस प्रकृति के हर कण में अपने आप को महसूस करते हैं। आपने अभी […] - [रूठती नदियां और तड़पता सागर](https://www.chubhan.today/ruthti-nadiyan-aur-tadapta-sagar/): आप सब जानते ही हैं कि ‘देवभूमि’ उत्तराखंड से टिहरी के विधायक माननीय किशोर उपाध्याय जी ने गंगा सहित सभी पवित्र नदियों, हिमालय और समुद्र को बचाने के लिए एक मुहिम चला रखी है, उनके इस सफर में “चुभन परिवार” भी उनके साथ है और इसी श्रृंखला में आज पुनः हमने एक संवाद का आयोजन किया है। गंगा सागर का संदेश| किशोर उपाध्याय: एक राजनेता और पर्यावरण प्रहरी किशोर जी उत्तराखंड की टिहरी विधानसभा सीट से तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। राजनीतिक शख्सियत तो आप हैं ही, लेकिन आपकी पहचान एक पर्यावरणविद की भी है। आपने जम्मू कश्मीर से […] - [हिमालय गंगा बचाओ अभियान : एक महत्वपूर्ण कदम](https://www.chubhan.today/himalay-bachao-ganga-bachao/): हिमालय बचाओ-गंगा बचाओ अभियान एवं वनाधिकार आंदोलन के प्रणेता किशोर उपाध्याय जी की महाकुंभ यात्रा – विधायक किशोर उपाध्याय जी, आज से हिमालय बचाओ-गंगा बचाओ अभियान के तहत माघी पूर्णिमा के अवसर पर प्रयाग राज के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। उपाध्याय जी ने कहा है कि जिस तरह हिमालय पर परिस्थितियां बन रही हैं, अत्यन्त चिंता जनक हैं। हिमालय में बर्फ एक तिहाई भी नहीं रह गई है और उसी तरह की स्थिति गंगा सहित हिमालयी नदियों में जल की भी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ समय के उपरान्त एवरेस्ट की चोटी पर भी हिम के दर्शन […] - [महाकुंभ : एक प्राचीन आयोजन की आधुनिक व्याख्या](https://www.chubhan.today/mahakumbh-ek-pracheen-ayojan/):                  – शबिस्ता बृजेश                  वरिष्ठ साहित्यकार, आलोचक,                 चिंतक मुस्लिमों पर प्रतिबंध और सामाजिक न्याय का सवाल महाकुंभ तप साधना का महापर्व है। इस बार प्रारम्भ से ही इस महाकुंभ में अनेक बातें उठी। पहली बात मुस्लिमों के प्रतिबंध को ले कर हुई । मुझे यह बात उचित भी लगी कि जहां श्रद्धा नही वहां जाने की आवश्यकता क्या ? किन्तु कारण जो लिया गया वह गलत था। अरब के मुसलमानों के कृत्य के लिए हिंदुस्तानी मुस्लिम ज़िम्मेदार […] - [मैसूर का दशहरा : एक अद्वितीय सांस्कृतिक उत्सव](https://www.chubhan.today/mysore-ka-dussehra/):   मैसूर: दक्षिण भारत का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रत्न मैसूर पैलेस: स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण कर्नाटक स्थित मैसूर दक्षिण भारत के ऐतिहासिक और अद्भुत पर्यटन स्थलों में गिना जाता है, जहां हर साल करोड़ों की तादाद में देश-विदेश से पर्यटकों का आगमन होता है। इस शहर का मुख्य आकर्षण यहां का मैसूर पैलेस है, जो अपनी विशालता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा भी मैसूर में कई प्राचीन संरचनाएं मौजूद हैं, जिन्हें यात्रा के दौरान देखा जा सकता है। इन सब के अलावा यह प्राचीन शहर अपने हर साल मनाए जाने वाले दशहरे के लिए भी विश्व […] - [विराट अनुभूति : डॉक्टरी जीवन का पहला अध्याय](https://www.chubhan.today/viraat-anubhuti/):   विराट अनुभूति एक ऐसी अवस्था है जहां हम स्वयं को विश्व के साथ जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। यह एक ऐसी पवित्र और दिव्य अनुभूति है, जिसमें हम अपने छोटे-छोटे संकटों और चिंताओं को भूलकर जीवन की विशालता और सुंदरता को देखते हैं। डॉ. गुप्ता का जीवन – सेवा और सहयोग से हम अपने आप को दूसरों के साथ जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। ऐसा ही भाव हमारे चुभन परिवार के वरिष्ठ सदस्य डॉ. बी. सी. गुप्ता जी अपने मन मे रखते हैं, तभी उनका जीवन विराट अनुभूतियों की कहानियों से भरा हुआ है। उनका लेखन, उनकी पेंटिंग्स…..हर जगह […] - [टूटता पिघलता हिमालय और सूखती गंगा](https://www.chubhan.today/ganga-himalaya-environmental-significance/):   भारत की धरती पर दो ऐसे स्थल हैं जो न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी रखते हैं – गंगा नदी और हिमालय पर्वत। ये दोनों भारत की आत्मा और संस्कृति के स्तंभ हैं, जो सदियों से लोगों को आकर्षित करते हैं। गंगा नदी – गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र नदी मानी जाती है। इसका उद्गम हिमालय की गंगोत्री से होता है और यह नदी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती हुई बंगाल की खाड़ी में मिलती है। गंगा नदी के किनारे कई पवित्र स्थल हैं, […] - [प्लास्टिक खाने वाले बैक्टीरिया : पर्यावरण संरक्षण का नया अवसर](https://www.chubhan.today/plastic-eating-bacteria-environmental-solution/): समुद्र में प्लास्टिक खाने वाले बैक्टीरिया की खोज पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। ये “प्लास्टिक-खाने वाले बैक्टीरिया” या “पॉलीमर-डिग्रेडिंग बैक्टीरिया” के रूप में जाने जाते हैं। ये बैक्टीरिया समुद्र, नदियों, और जलाशयों में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बेहतर होता है। इसके अलावा, यह पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग समाधान की दिशा में एक सकारात्मक विकास है। समुद्री जीवन की सुरक्षा और प्लास्टिक प्रदूषण कम करने में इनका योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इन बैक्टीरिया की विशेषताएं: इन बैक्टीरिया के महत्व: इन बैक्टीरिया की खोज और अध्ययन से हमें: हालांकि, इन […] - [पितृपक्ष 2024: पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि और आज के समाज के लिए इसका महत्व](https://www.chubhan.today/pitru-paksha-2024/): भारतीय संस्कृति में पितृपक्ष एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि का प्रतीक है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है, जो सामान्यतः सितंबर या अक्टूबर माह में पड़ता है। इस वर्ष यह पक्ष 18 सितंबर 2024 से आरंभ होकर 2 अक्टूबर 2024 तक चलेगा। पितृपक्ष का महत्व इसका महत्व हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के भाव में निहित है। यह त्योहार हमें अपने पूर्वजों की याद दिलाता है और उनके द्वारा किए गए बलिदानों को याद करने का अवसर प्रदान करता है। इसके के दौरान, लोग […] - [भारतीय त्योहारों और ऋषियों की परंपरा का वैज्ञानिक आधार](https://www.chubhan.today/indian-cultural-wisdom-health-traditions/): – डॉ. नारदी जगदीश पारेख “आदिम संस्कृती का द्योतक,भारत मेरा देश है।आर्ष दृष्टा ऋषियों का पूजक,भारत मेरा देश है। वेद पुराणों का सर्जक,भारत मेरा देश है।सारे विश्व का पथ प्रदर्शकभारत मेरा देश है।” ऋषियों का योगदान: प्रकृति और स्वास्थ्य का संगम – “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को छोटी-छोटी क्रिया द्वारा जीवन से जोड़ दिया है। सुबह उठकर सूर्य को अर्घ्य दे दो। जमीन पर पैर रखने के पहले धरती को नमन करो। नहा के तुलसी के पौधे में पानी दो, खाते वक्त पहला निवाला धरती का। दूसरा गाय का, तीसरा कौवे का।चीटियों को और जलचर जीवों को खिलाने की भी […] - [शिक्षक दिवस : ज्ञान और प्रेरणा का उत्सव](https://www.chubhan.today/shikshak-diwas/): डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: शिक्षक दिवस की प्रेरणा   जन्म, परिवार और प्रारंभिक शिक्षा स्वतंत्र भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी थे।स्वतंत्रता के बाद देश को आधुनिक शिक्षा की दिशा में आगे ले जाने में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर शिक्षक के रूप में की थी। एक अध्यापक होने के साथ ही राधाकृष्णन प्रसिद्ध दार्शनिक, विचारक और राजनेता भी थे, इसलिए उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर हर वर्ष 05 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ (Teacher’s day) के रूप में मनाया जाता है। दर्शनशास्त्र में गहरी रुचि और […] - [ठाकुर जी के प्रति समर्पण: एक साधारण जीवन की असाधारण यात्रा](https://www.chubhan.today/thakur-ji-ki-bhakti/):   मानो या न मानो, विश्वास करो या न करो…..एक बार पढ़ो अवश्य – डॉ. बी.सी.गुप्ता   मेरी बाल्यावस्था का परिचय जन्म और परिवेश मेरा जन्म 1930 में हुआ। उस समय भारत में अंग्रेज़ों का शासन था। मैं नॉर्थ प्रॉविंसेज़ आगरा एंड अवध, यानी आज के उत्तर प्रदेश, के एक छोटे कस्बे से हूँ। यह कस्बा बेहद साधारण था। मेरा परिवार भी वहाँ के आम परिवारों जैसा ही था। उस परिवार में एक बालक था, यानी मैं, इस ब्लॉग का लेखक। उस दौरान मेरी उम्र 7 से 10 साल के बीच थी। स्कूल और संस्कार मैं सनातन धर्म हाई स्कूल […] - ["संस्कृत दिवस:मृदुल कीर्ति जी की अद्वितीय साहित्यिक यात्रा"](https://www.chubhan.today/sanskrit-diwas-par-mridul-kirti/): हमारे देश में प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर को “संस्कृत दिवस” के रूप में मनाया जाता है। श्रावणी पूर्णिमा अर्थात् रक्षा बन्धन का पावन पर्व भी इसी दिन होता है और यह ऋषियों के स्मरण तथा पूजा और समर्पण का पर्व माना जाता है। वैदिक साहित्य में इसे “श्रावणी” कहा जाता था। इसी दिन गुरुकुलों में वेदाध्ययन कराने से पहले यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है। आजकल देश में ही नहीं, विदेशों में भी इस दिन पर संस्कृत उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसमें केन्द्र तथा राज्य सरकारों का भी योगदान उल्लेखनीय है। आज के दिन हम […] - [आस्था का टकराव : राष्ट्रीयता में बिखराव](https://www.chubhan.today/aastha-ka-takaraav-raashtreey/):   आस्था और संस्कृति का संघर्ष: क्या खोती जा रही है भारतीयता – अजय “आवारा” राष्ट्र निर्माण की बुनियाद क्या है साधारणतया, किसी राष्ट्र के निर्माण की पृष्ठभूमि, संस्कृति एवं आस्था पर आधारित होती है। एक विशेष तरह की पहचान संस्कृति एवं एक विशेष आस्था के केंद्र के इर्द-गिर्द ही उस राष्ट्र की धुरी घूमती है। जो आगे चलकर उस राष्ट्र की पहचान के रूप में स्थापित होती है परंतु, यह सिद्धांत हमारे देश पर लागू नहीं होता। भारत अनेक संस्कृतियों का समीकरण है, या यूं कहें कि अनेक परंपराओं एवं आस्थाओं की संधि का नाम है भारत वर्ष।आस्था के […] - [राम : अंतर्राष्ट्रीय वेब-संगोष्ठी](https://www.chubhan.today/ram/): पूरी दुनिया जानती है कि 22 जनवरी 2024 को प्रभु राम, अयोध्या की पवित्र भूमि में उसी जगह विराजेंगे, जो उनकी जन्म भूमि है। विगत शताब्दियों में क्या हुआ, अब यह हम नही सोचना चाहते। हम तो बस अब एक उत्सव नही, महोत्सव मनाना चाहते हैं। “चुभन पॉडकास्ट”  पर आप समय-समय पर ऐसे आयोजन देखते भी रहते हैं, जैसे अभी कुछ दिनों पूर्व हमने “शिव-तत्व” पर एक अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी आयोजित की थी। उसमें भी देश ही नही विदेशों से भी विद्वद्जन जुड़े। आदरणीया डॉ. मृदुल कीर्ति जी ने तो अपनी बातों से हमें भक्ति रस से सराबोर कर दिया। […] - [मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह जी से मुलाक़ात](https://www.chubhan.today/mantri-mayank-eeshvar-sharan-singh/): 👆 मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह जी के साथ मेरे संवाद को इस वीडियो में सुनें। आज मैंने जायस, जो कि तिलोई विधानसभा क्षेत्र में आता है, वहां के विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह जी से मुलाकात की। आप उत्तर प्रदेश सरकार में चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, संसदीय कार्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण मंत्री हैं। जायस की भूमि इतनी पावन पवित्र है क्योंकि वह गोरखनाथ जी की भूमि है, जहां कहते हैं कि उनका आगमन प्रत्येक वर्ष होता था और उसके साथ ही साथ विश्व प्रसिद्ध सूफी कवि मलिक मोहम्मद जायसी […] - [हिन्दी दिवस](https://www.chubhan.today/hindi-diwas/): चुभन के पाठकों को “हिंदी-दिवस” की हार्दिक शुभकामनाएं। हिंदी का वैश्विक महत्व और बढ़ता प्रभाव हिंदी हमारी राजभाषा है अतः इसका सम्मान बहुत आवश्यक है।चीनी भाषा के बाद बोली जाने वाली विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा हमारी हिंदी ही है।आज हिंदी राजभाषा,संपर्क भाषा,जनभाषा के सोपानों को पार कर विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है तो वही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी ज़रूरी है। 14 सितम्बर 1949 और अनुच्छेद 343 की भूमिका आज यानि 14 सितम्बर को हम ‘हिंदी-दिवस’ मनाते हैं।वास्तव में किसी भी राष्ट्र की आधारशिला राष्ट्रभाषा होती है।संविधान सभा में […] - [दो भाषा और कुछ विचार, तमिल और तेलुगु के आचार](https://www.chubhan.today/do-bhasha-aur-kuch-vichar/): आप सब जानते ही हैं कि चुभन पर हमारा प्रयास यह रहा है कि साहित्य, कला और संस्कृति के आधार पर हम पूरे देश को एक साथ लाएं, आपस में एक दूसरे के साथ भावों और विचारों का आदान-प्रदान करें। इस उद्देश्य के तहत हमने बहुत से कार्यक्रम चुभन से प्रसारित भी किये, जिन्हें आपने सुना और सराहा भी। दक्षिण भारतीय भाषाओं पर कार्यक्रम – दक्षिण भारत की हर क्षेत्रीय भाषा और साहित्य पर हमने कार्यक्रम दिए, उसी कड़ी में आज हम तेलुगु भाषा के लोकप्रिय कवि सिराजुद्दीन जी के विचारों और उनकी रचनाओं को सुनेंगे। आप जितने प्रसिद्ध अपनी […] - [आधुनिक संस्कृत की पहचान : पद्मश्री वेदकुमारी घई जी](https://www.chubhan.today/adhunik-sanskrit-ki-pahchan/): वेदकुमारी घई जी को श्रद्धांजलि – इस वर्ष 30 मई को पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध शिक्षाविद और संस्कृत की प्रोफेसर वेदकुमारी घई जी का देहावसान हो गया। आज ‘संस्कृत दिवस’ है।प्रत्येक वर्ष हम श्रावण पूर्णिमा के तीन दिन पूर्व और तीन दिन बाद संस्कृत सप्ताह मनाते हैं। आज के दिन यदि हम उनका स्मरण न करें तो यह दिवस अधूरा ही रह जाएगा। आप आधुनिक संस्कृत की पहचान हैं। मैंने अगस्त 2021 में आपको “चुभन” पर आमंत्रित किया और आपसे बहुत सारी बातें करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज के दिन वेदकुमारी घई जी को “चुभन” श्रद्धा सुमन अर्पित […] - [कला या चमत्कार - अकबर मोमिन का सफर](https://www.chubhan.today/kala-ya-chamatkar/): हमारी सोच को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली कला हमारी सोच को एक अनदेखे मुक़ाम तक ले जाने वाली, और कल्पना को साकार करने वाली कला ही होती है। ये यक़ीन दिलाती है कि हर चीज़ सीमा में बंधी नहीं होती। किसी भी कला में इतनी शक्ति होती है कि वह मानव-मन को रूहानियत में बदल देती है, क्योंकि कला का सीधा संबंध हृदय से होता है। आज हम अपने “चुभन पॉडकास्ट” पर जिनसे मिलेंगे, उनका नाम है अकबर मोमिन, जो कि एक मशहूर चित्रकार है, सिर्फ मशहूर ही नहीं, बल्कि उन्हें जादूगर भी बोला जा सकता है क्योंकि […] - [आम तो ख़ास है - कलीमुल्लाह खां साहब](https://www.chubhan.today/aam-to-khas-hai/): पद्मश्री कलीमुल्लाह खान साहब के साथ कुछ पल…..   आज मैं जिनसे आपको मिलवाने जा रही हूं, वे हैं मैंगो मैन के नाम से दुनिया भर में मशहूर पद्मश्री से सम्मानित कलीमुल्लाह खां साहब।   👆🏾 खान साहब के साथ बातचीत के कुछ अंश। मुझे खान साहब के साथ बातचीत का अवसर तो मिला ही, साथ ही उन्होंने बड़े स्नेह से हमें अब्दुल्ला नर्सरी के एक एक पेड़ से मिलवाया,उनसे बातचीत की. आप को शायद थोड़ा आश्चर्य हुआ हो मेरी बात से परंतु उनके लिए उनके बाग का एक एक पेड़ उनके बच्चे के समान है और जितनी देर हम […] - [सावन मास का महत्व](https://www.chubhan.today/savan-maas-ka-mahatva/): हमारे हर पर्व-त्यौहार का अपना अलग ही महत्व है।साल के बारह महीने के हिसाब से भी इनका अलग-अलग महात्म्य होता है।श्रावण या सावन मास का अपना एक अलग ही स्थान है।साहित्यकारों ने भी जितना इस माह के ऊपर अपनी रचनाएँ लिखीं उतनी किसी अन्य पर नहीं।इसी तरह हमारे बॉलीवुड में भी सावन और बरसात के गीतों की कोई कमी नहीं है।नायक और नायिका के मिलन और विरह के लिए जितना अधिक सावन के महीने का उपयोग हुआ उतना किसी अन्य मास का नहीं। श्रावण मास का आरंभ –   पूर्णिमा के बाद चंद्रमा जब श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करता है […] - [स्वर्णज्योति जी: हिंदी साहित्य में बहुभाषीय चेतना](https://www.chubhan.today/swarnim-chhavi/): ऐसा माना जाता है, कि साहित्यकार समाज का पथ प्रदर्शक होता है। गूढ़ विषयों को सरल मानदंड लेकर आम आदमी के सामने प्रस्तुत करना, साहित्यकार के कर्तव्य में आता है। जितना उचित मंथन, उतनी ही सही दिशा समाज के लिए तय हो जाती है और जितना सटीक चिंतन, समाज की उतनी ही संतुलित मानसिकता स्थापित होती है, परंतु साहित्यकार के लिए एक बंधन यह होता है, कि वह जिस देश काल, जिस विधा, जिस भाषा में लिखता है, साधारणतया उसकी पहुंच वहीं तक सीमित हो जाती है। और, अगर कोई अनेक भाषा में लिखे तो? जरा सोचिए, उसके चिंतन, मनन […] - [इल्हाम (ईश्वरीय कृपा)](https://www.chubhan.today/ilham-ishvariya-kripa/): कवि की पहचान, कवि की कलम से-                   -कमल किशोर राजपूत सर्वप्रथम सुरक्षित बचपन की संक्षिप्त यात्रा: ​भारत की आध्यात्मिक नगरी देवास में जन्मा, पड़ोसी बुआ ने “कमल” नाम रखवाया जो बहुत काम आया, संयोग से कमल भारतीय अध्यात्मवाद का प्रतीक भी है। पंक का कमल के जीवन में विशेष स्थान रहा है। मेरी माँ (जीजी) श्रीमती तुलसी बाई और पिताजी (दादाजी) श्री रामकिशनजी एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबन्ध रखते थे। ​अपने बचपन का बहुत ही दिलचस्प क़िस्सा है; मुझसे पूर्व पाँच बहनें और दो भाई…. लेकिन दोनों भाई बचपन में ही […] - [नारी तेरे जितने रंग, होली के भी उतने रंग](https://www.chubhan.today/nari-tere-jitne-rang-holi-ke-bhi/): अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवं होली विशेष   ✍?अपनी साँसों में मेरी, धड़कनें समाये हुए। ✍?वजूद अपना ही खुद,दाँव पे लगाये हुए॥ ✍?सँभल सँभल के क़दम,वो ज़मीं पे रखती थी। ✍?मुझ को नौ माह तक,माँ कोख में छुपाये हुए॥                       -डॉ. सागर त्रिपाठी मां का रिश्ता अनमोल –   मां….उसका जीवन में क्या महत्व है, ये उसके रहते शायद कोई भी महसूस नहीं कर पाता, उसके जाने के बाद ही समझ आता है कि दुनिया के हर रिश्ते से ज़्यादा गहरा रिश्ता मां का ही है, जिसके सपने अपने बच्चों की […] - [बिखरते परिवार, लुप्त होती परंपराएं](https://www.chubhan.today/bikharte-parivar/): परिवार की परिभाषा –   आमतौर पर, हमें लगता है कि परिवार रिश्तो का बंधन है। परिवार रिश्तों में कर्तव्य एवं अधिकारों की व्यवस्था है। परंतु ऐसा नहीं है। वस्तुतः परिवार की नींव दो ऐसे लोगों के संबंध एवं मिलन से पड़ती है जो एक दूसरे से बिल्कुल अनजान होते हैं। तब हम किस आधार पर परिवार को रिश्तो की परिभाषा में बांधते हैं? परिवार वह व्यवस्था है, जहां विभिन्न गुण संपन्न लोगों को आपसी समझ एवं सहयोग से अपनी व्यवस्था को चलाना होता है। जैसे बुजुर्ग लोगों के पास अनुभव होता है एवं युवा शक्ति बुजुर्ग के मार्गदर्शन में […] - [होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में अपार संभावनाएं](https://www.chubhan.today/homoeopathy-chikitsa/): “कतरा था एक फिर भी समंदर लिखा गया , रहजन को इतिहास में रहबर लिखा गया, एकलव्य का अंगूठा सुनो काट कर यहां, अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर लिखा गया।” परिचय – कई बार ऐसा होता है कि किसी एक को आगे बढ़ाने के लिए हम दूसरे की जाने- अनजाने इतनी उपेक्षा कर जाते हैं कि या तो दूसरा बिल्कुल खत्म ही हो जाता है या फिर अपने हुनर, अपनी काबिलियत से वो उस मुकाम तक पहुंचता है कि उसकी कद्र न करने वालों को अपनी गलती का एहसास होता है। कई बार घर में किसी एक संतान पर ही पूरा […] - [शिव भक्ति पथ - लिंगायत](https://www.chubhan.today/shiv-bhakti-path-lingayat/): परिचय – लिंगायत मत भारतवर्ष के प्राचीनतम सनातन हिन्दू धर्म का एक हिस्सा है। इस मत के ज्यादातर अनुयायी दक्षिण भारत में हैं। यह मत भगवान शिव की स्तुति आराधना पर आधारित है। भगवान शिव जो सत्य, सुंदर और सनातन हैं, जिनसे सृष्टि का उद्गार हुआ, जो आदि अनंत हैं। हिन्दू धर्म में त्रिदेवों का वर्णन है जिनमें सर्वप्रथम भगवान शिव का ही नाम आता है। 👆🏾 कन्नड़ के प्रसिद्ध साहित्यकार स्व.शतायु श्री वेंकट सुबैया जी के साथ डॉ. स्वर्ण ज्योति जी। लिंगायत मत –   इस मत के उपासक “लिंगायत” कहलाते हैं। लिंगायतों को शैव संप्रदाय को मानने वाले […] - [उल्लास और सामाजिक समरसता का महापर्व:दीपावली](https://www.chubhan.today/ullas-aur-samajik-samrasta/): दीवावली पर्व की शुभकामनाएं – उल्लास और समृद्धि के महापर्व दीपावली की मेरे सभी पाठकों को हार्दिक बधाई।ईश्वर हम सबको अज्ञान से ज्ञान की ओर,अशुभ से शुभ की ओर तथा अँधेरे से प्रकाश की ओर जाने का मार्ग दिखाएँ। दीवाली ही एकमात्र ऐसा पर्व है,जो भारत में सर्वत्र मनाया जाता है।हिमालय से कन्याकुमारी और गुजरात से असम तक सैकड़ों छोटे-बड़े त्यौहार मनाए जाते हैं,परन्तु उनमें से अधिकांश एक सीमित क्षेत्र में ही मना लिए जाते हैं। दीपावली ही एक ऐसा पर्व है जो क्षेत्र और प्रान्त की सीमाएं तोड़कर पूरे भारत में धूम-धाम से मनाया जाता है।इस की एक विशेषता […] - [बहुआयामी रंग लिए एक व्यक्तित्व](https://www.chubhan.today/bahuaayami-rang-liye/): आज हम बंगलुरू की डॉ. इंदु झुनझुनवाला जी के बारे में बात करेंगे, जो कि एक कवयित्री, साहित्यकार, समीक्षक, कलाकार ,विचारक ,जीवन प्रशिक्षक, प्रोफेसर, अनुवादक , दार्शनिक, संस्थापक अध्यक्ष इत्यादि अनेक रूपों में हमारे सामने आती है। अनेकों सम्मान और पुरस्कारों से आपकी रचनाओं और कार्यों  को सराहा गया है। इंदु जी के ही शब्दों में उनका परिचय –   परंतु अपना परिचय वे स्वयं बहुत सुंदर शब्दों में देती हैं, ” मेरे लिए बस इतना ही, एक तलाश उन मोतियों की, जो मेरे, आपके, हम सबके अन्तर्मन में कहीं गहरे,  बहुत गहरे छुपे हैं। जिन्हें इन्तजार है मेरा ,आपका….हम […] - [सबका सम्मान, अपना अपमान](https://www.chubhan.today/sabka-samman-apna-apman/):                          – अजय ‘आवारा’   स्वयं की पहचान का अपमान क्यों –   इतना तो सब कहते हैं कि हमें अपनी परंपराओं पर अभिमान करना चाहिए। यह भी सब मानते हैं कि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। इस बात में भी कोई दो राय नहीं कि हमें अन्य संस्कृति, सभ्यता एवं परंपराओं का सम्मान भी करना चाहिए, परंतु यह रीत कहां से आ गई कि अन्य सभी संस्कृति एवं परंपराओं का सम्मान करते हुए हम स्वयं की पहचान का अपमान करने लग जाएं। लगता है, अपने देश […] - [हिन्दी-दिवस](https://www.chubhan.today/hindi-diwas-2/): हिंदी की विकास यात्रा –   पारंम्परिक तौर पर हम हिंदी दिवस प्रतिवर्ष मनाते हैं। सवाल यह है कि इतने वर्षों के बाद हिंदी कहां तक पंहुची है? भारतवर्ष में हिंदी की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या हिंदी वास्तव में हमारे सांस्कृतिक मोतियों को पिरोने वाला सूत्र बन गई है? ऐसे अनेक सवाल हैं जिनके उत्तर अभी भी अज्ञात हैं। आइए आज हिंदी की विकास यात्रा पर कुछ मंथन किया जाए। लेखिका शशि मंगल जी –   इस मंथन में हमारे साथ हैं, हिंदी की वरिष्ठ एवं श्रेष्ठ लेखिका शशी मंगल जी। आप चर्चित गद्य एवं पद्य लेखिका हैं। आपने […] - [अधूरी आज़ादी](https://www.chubhan.today/adhuri-azaadi/):              -रामेंद्र सिंह चौहान,         संपादक डी डी न्यूज़ लखनऊ   बस इसीलिए तो कहता हूँ आज़ादी अभी अधूरी है। कैसे उल्लास मनाऊँ मैं, थोड़े दिन की मजबूरी है॥ दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएँगे। गिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएँगे॥   यह सपना हमारे पूर्व प्रधानमंत्री पंडित अटल बिहारी बाजपेई का नही है। यह सपना भारत की हर उस आंख का है जिन्होंने 1947 में आधी आज़ादी पाई है। हम कश्मीर की वादियों में जो खिलते हुए फूल देखते हैं वह अकेला सच नहीं है, उनके […] - [हर घर तिरंगा](https://www.chubhan.today/har-ghar-tiranga/):                       -रामेंद्र सिंह चौहान                         संपादक डी डी न्यूज़, लखनऊ तिरंगा अभियान –   सवाल उठता है कि आखिर हर घर तिरंगा अभियान क्यों? यह तिरंगा अभियान इसलिए क्योंकि अब काशी में बम विस्फोट नहीं होते, अब बाबा काशी विश्वनाथ का मंदिर गलियों से नहीं मुख्य सड़क और मां गंगा तट से जुड़ता है। काशी अब सनातन संस्कृति के केंद्र के साथ व्यवसायिक गतिविधियों और पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है, हर घर तिरंगा अभियान […] - [मां](https://www.chubhan.today/maa/): “मां तेरी उपमा अनुपम है, अनुपमेय गरिमा है, तू है यशस्वी शाश्वत तेरी, अकथनीय महिमा है।” माँ को नमन –   मां एक छोटा सा नाम, किन्तु जिसका विस्तार नभ से भी बड़ा है।मां का ममत्व किसी अविरल बहते मीठे जल की नदी से भी ज़्यादा शीतल है ।माँ, जिसके आँचल की शीतलता का मुकाबला, पछुवा की ठंडी पवन भी नहीं कर सकती, मां जिसका मन गंगा से भी पावन है, माँ जिसके ह्रदय में न जाने ममता का कितना विशाल समुद्र समाया है, माँ जो सृष्टि की सृजनकर्ता है, जिसकी कोख से स्वयं भगवान अवतरित हैं।मांअपने छोटे से घर […] - [किन्नर गाथा](https://www.chubhan.today/kinner-gatha/): किन्नर समुदाय –   किन्नर, वह समुदाय, जिसे शायद समाज अपना हिस्सा मानता ही नहीं है। पता नहीं, हम क्यों भूल जाते हैं कि किन्नर, हमारे इतिहास की रचना के एक प्रमुख स्तंभ रहे हैं। फिर वह चाहे महाभारत रही हो या कोई और कथा। राजघरानों में तो किन्नर कला, शिक्षा, ज्ञान एवं दर्शन के प्रतीक माने जाते थे। वह कला एवं ज्ञान के ध्वजवाहक आज कहां है? युद्ध के रणनीतिकार आज कहां है? गाहे-बगाहे, अब वे कई चौराहों पर तो दिख जाते हैं। या जन्म एवं शादी पर बधाई गाते भी दिख जाते हैं, परंतु इसके बाद, कौन सी […] - [हमारी अस्मिता और आस्था : श्री राम](https://www.chubhan.today/hamari-asmita-aur-aastha/): युग-युग के प्रतिनिधि : श्री राम   श्री राम एक युग विशेष के प्रतिनिधि न होकर, युग-युग के प्रतिनिधि हैं।उनका संघर्षपूर्ण चरित्र हमें कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा देता है। एक बात सत्य है कि भारतीय चिंतन-धारा को, जिन दो महान व्यक्तित्व ने सर्वाधिक प्रभावित किया है वे श्रीकृष्ण तथा श्री राम के व्यक्तित्व हैं।इन दो लोक नायकों के गरिमायुक्त, लोकोत्तर, अप्रतिम व्यक्तित्व ने भारतीय संस्कृति को कालजयी बनाकर विश्व की प्राचीनतम संस्कृति के रूप में सुरक्षित रखने में अपूर्व सफलता पाई है। विश्व की मानवता का कल्याण –   विश्व कल्याण तथा मानवता की उच्चतम अवधारणा ने, न केवल […] - [देश : संस्कृति या स्वाभिमान](https://www.chubhan.today/desh-sanskriti-ya-swabhiman/):                – अजय “आवारा”   देश, एक सीमा में बंधा भूमि का टुकड़ा मात्र नहीं है। न ही देश कुछ लोगों का समूह मात्र है और न ही देश एक शासन व्यवस्था का नाम है। देश, एक संस्कृति है, वहां रहने वाले लोगों की सांस्कृतिक पहचान है। देश की परिभाषा – >>>>>>>>>>>>>>lass=”yoast-text-mark” />>देश, यूं ही नहीं बन जाते। जब कुछ समूह, एक विशेष परंपरा एवं रीति के अनुसार अपना जीवन यापन करते हैं एवं अपने समाज के लिए कुछ नियमों की व्यवस्था कर देते हैं तो उस व्यवस्था को हम देश का नाम दे […] - [क्या हम भटक गए हैं ?](https://www.chubhan.today/kya-ham-bhatak-gye-hain/):           – अजय “आवारा”   आज, धर्म के नाम पर चर्चा करना, धर्म के नाम पर अधिकार मांगना, धर्म की आड़ में मानवता की बात करना, और धर्म के नाम पर अपने स्वार्थ एवं जिद को सिद्ध करना, शायद एक फैशन बन चुका है। धर्म का उद्देश्य –   आज, इंसान धर्म के नाम पर बुरी तरह बंट चुका है। सवाल यह उठता है, कि क्या धर्म इंसानियत और इंसानों को बांटने के लिए है ? जहां तक मेरी समझ का सवाल है, उसके अनुसार, किसी भी धर्म में मानवता को बांटना सिखाया नहीं गया है। […] - [संस्कृति के दो रंग, पहचानो अपना रंग](https://www.chubhan.today/sanskriti-ke-do-ramg/): होली, एक पर्व मात्र नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन भी है।होली के रंग तो एक दिन में उतर जाते हैं।क्या जीवन के रंगों का समावेश हमेशा के लिए नहीं कर लेना चाहिए ? होली के रंगों का महत्व – जाने-अनजाने, हम जीवन के रंगों को दरकिनार करते जाते हैं।पता नहीं क्यों हम चटकीले रंगों पर उदासीन रंगों को हावी होने देते हैं? क्यों न उदासी के रंगों को धोकर मुस्कुराहटों के रंग में खुद को डुबोया जाए? सच में दोस्तों, अगर हम ऐसा कर पाए तो जीवन जीने का तरीका, उसके मायने कुछ और ही हो जाएंगे।शायद हम रंगों की वो लकीर […] - ['द कश्मीर फाइल्स' : दिल को झकझोरती फ़िल्म](https://www.chubhan.today/the-kashmir-files/): ‘द कश्मीर फाइल्स’ फ़िल्म देखकर,जो कुछ मैंने महसूस किया, वह ज़िन्दगी में पहली बार हुआ।मेरा दिमाग सुन्न हो चुका था, कुछ भी महसूस करने की जैसे शक्ति ही नहीं थी।निश्चित रूप से यह एक फ़िल्म नहीं थी, एक ऐसा सच था, जिससे सम्पूर्ण मानव-जाति को शर्मिंदा होना चाहिए। बर्बरतापूर्ण कृत्य – हम सभी ने तमाम कहानियां पढ़ीं हैं,जिनमें बर्बरता की हदें पार हुईं।हिटलर, मुसोलिनी को पढ़ा है, लेकिन उन कहानियों से भी अधिक बर्बर कृत्य पर्दे पर देखना- 1- जब 24 कश्मीरी पंडितों को एक कतार में खड़ा करके आतंकियों द्वारा एक-एक करके गोली मारी जाती है, जिनमे महिलाएं और […] - [अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : श्रृंखला - 4](https://www.chubhan.today/antarrashtriya-mahila-divas/): International Women’s Day special : Part – 4 विश्व-पटल पर नारी और कश्मीर-दर्शन      – डॉ. अग्निशेखर   मैं वितस्ता हूं…..   “शायद जन्मांतरों की एक अव्यतीत स्मृति की तरह तुम मेरे भीतर किसी अबूझ उपत्यका में बहती नदी से निकली बाहर जैसे कोई फिल्मी दृश्य हो या महाभारत सीरियल का कोई अंश। ‘मैं वितस्ता हूँ ‘ कहा तुमने मुझसे लगा मुझे समयों के पार से बह रहा मैं अविगलित बर्फ के तूदे सा तुम में स्पंदित हुआ मैं और ‘मैं शिव हूँ ‘ कहा किसी ने मेरे भीतर से जैसे क्षणांश में पहचानते हुए तुम्हें मैं समझ नहीं […] - [अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : श्रृंखला - 3](https://www.chubhan.today/antarrashtriya-mahila-diwas-3/): International Women’s Day special : part – 3 मैं, मैं ही रहूंगी…. – डॉ. स्वर्ण ज्योति “मैं, मैं ही रहूंगी अपनी ही छवि बनाऊँगी मैं राधा नहीं बन सकती कि आज प्रेयसी प्रताड़ित है मैं सीता नहीं बन सकती कि आज पतिव्रता पतित है मैं मीरा नहीं बन सकती कि आज भक्ति भ्रमित है मैं यशोधरा नहीं बन सकती कि आज विश्वास व्यथित है मैं गांधारी नहीं बन सकती कि आज त्याग त्यजित है मैं उर्मिला नहीं बन सकती कि आज समर्पण सारहीन है मै, मैं ही रहूँगी अपनी ही छवि बनाऊँगी कर्तव्य सारे निभाऊँगी मैं, मैं ही रहूंगी अपनी […] - [अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : श्रृंखला - 2](https://www.chubhan.today/antarrashtriya-mahila-diwas/): International Women’s Day special : Part – 2 परंपरा एवं आधुनिकता की बुलंद आवाज़ अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के अवसर पर आज जिस शख़्सियत को हम ‘चुभन’ पर आमंत्रित कर रहे हैं, वे हैं डॉ. चम्पा श्रीवास्तव जी, जिनके व्यक्तित्व को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता।हिंदी साहित्य में आपके योगदान को कहने की कोशिश करना भी काफी कठिन है। आपने 42 वर्ष तक डिग्री कॉलेज में अध्यापन कार्य किया और प्राचार्य के पद पर भी रहीं। आपकी उपलब्धियों की यदि बात की जाए तो आप ‘उत्तर प्रदेश माध्यमिक चयन बोर्ड’, इलाहाबाद तथा ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग’ […] - [अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : श्रृंखला - 1](https://www.chubhan.today/antarrashtriya-mahila-diwas-1/): International Women’s Day special : part – 1 लीक से अलग सोचती एक आवाज़ : उर्मिला उर्मि “किसी चराग़ से रोशन नहीं किया ख़ुद को, हम अपना आफ़ताब साथ ले के चलते हैं।” – उर्मिला उर्मि आज से ‘चुभन’ पर अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International women’s Day) के कार्यक्रमों का आरंभ हो रहा है, इस श्रृंखला में आज, जिन्हें हम ‘चुभन पॉडकास्ट’ पर आमंत्रित कर रहे हैं, वे हैं लोकप्रिय कवयित्री उर्मिला उर्मि जी और उनके लिए कहा जा सकता है कि स्वर के बिना गीत अधूरा है, और कर्तव्य बिन अधिकार। ख़ुशबू की पहचान फूल से है, तो महिला अधिकारों […] - [अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : मंथन](https://www.chubhan.today/antarrashtriya-mahila-diwas-manthan/): International Women’s Day special : Curtain Raiser इस साल भी अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International women’s Day) की तिथि आ पहुंची है। पर क्या, हर बार की तरह इस बार भी सिर्फ वाद-विवाद, विवाद या विचारों की अभिव्यक्ति कर देना काफी रहेगा। क्या हमें इसके दूसरे पहलू पर विचार नहीं करना चाहिए ? जब महिला दिवस आता है, तब महिला अधिकारों की बात जोर-शोर से उठाई जाती है। इतिहास साक्षी रहा है, कि अधिकारों का अधिकतर दुरुपयोग ही हुआ है। आज कानून ने महिलाओं को अनेकों अधिकार तो दे दिए हैं, परंतु यह जगजाहिर है कि इन का सदुपयोग कम व […] - [वैलेंटाइन्स डे : सच से कितना दूर, कितना पास](https://www.chubhan.today/valentines-day/): – अजय “आवारा” परंपरा निभाना अच्छी बात है। इससे समाज में संस्कार आते हैं, परंतु किसी भी संस्कृति की परंपरा को सिर्फ अनुसरण के नाम पर अपना लेना कहां तक उचित है? इस महीने वैलेंटाइन्स डे की धूम रही है। माना जाता है कि यह प्रेमियों का दिन है। मेरे विचार से वैलेंटाइन्स डे की परंपरा को अपनाने से पहले हमें हिंदुस्तानी संस्कृति में प्रेम की अभिव्यक्ति का भी अध्ययन कर लेना चाहिए। हमारी रीतियों और रिवाजों में प्रेम की अभिव्यक्ति, और इसके परिणय तक जाने के अनेक उदाहरण मिल जाएंगे। यह सही है, कि नई परंपराओं का जुड़ना, समाज […] - [लोकतंत्र में मतदान का महत्व](https://www.chubhan.today/loktantra-me-matdan-ka-mahatva/): “दान कर, तो तू महादान कर, वतन पर अपना कर्ज अदा कर, मतदान दिवस है आज का दिन, चल निकल,आज तू मतदान कर। वतन का भी तुझ पर हक है, तेरे हिस्से का बाकी ये कर्ज है, काबिल को उसका हक अदा कर, चल निकल, आज तू मतदान कर। अभी नहीं जागा तो कर्ज रह जाएगा, देश गलत हाथों में चला जाएगा, अपने स्वार्थ का तू आज त्याग कर, चल निकल, आज तू मतदान कर।” कवि अजय “आवारा” जी ने इन पंक्तियों में मतदान के महत्व को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है। वास्तव में लोकतंत्र में मतदान […] - [संतों की भूमि, कर्नाटक की भूमि](https://www.chubhan.today/santon-ki-bhumi/):                    -डॉ. श्रीलता सुरेश भारत की समृद्ध संस्कृति प्राचीन काल से हैl उच्चतम मानवीय मूल्यों को पूरे विश्व में स्थापित करने के लिए विख्यात रहा हैl भारत देश साधु-संतों का देश हैं।संत- परंपरा हमारे देश का आध्यात्मिक वैभव है।धर्म के कारण यह संतों के कार्य का मुख्य उद्देश्य है।संतों ने साहित्य और धर्म समाज सुधार में भी बड़ा योगदान दिया है।समाज को निरंतर जगाने का कार्य विभिन्न राज्यों के अनेक संतों ने किया हैl समाज-जागरण के इस कार्य के लिए संतों के उपकारों को जितना मानें उतना कम है। इन में भी […] - [रहें न रहें हम, महका करेंगे....लता दीदी](https://www.chubhan.today/rahe-na-rahe-ham-mahka-karenge/): आज सुबह जैसे ही भारत रत्न,स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी के देह-त्याग की खबर सुनी, सच में जैसे कुछ देर के लिए दुनिया रुक गई।मैंने देह-त्याग इसलिए कहा क्योंकि वास्तव में उनकी मृत्यु नहीं हुई, उन्होंने शरीर छोड़ा किन्तु उनकी आत्मा, उनकी आवाज़ हमारे दिलों में सदियों तक गूंजती रहेगी। वे अमर हैं और युगों तक अमर रहेंगी।युग की विभूतियां, युग प्रसूत होती हैं।लता जी में अमरता की सांस थी। उनकी आवाज़ से न जाने कितने लोगों ने प्रेरणा ली और अपना भविष्य बनाया। मेरी मां और उनके सभी भाई-बहन तथा उनके बच्चे, सबके लिए आज का दिन ऐसे है, […] - [वर दे वीणावादिनि वर दे](https://www.chubhan.today/var-de-veenavadini/): वसंत के आगमन के साथ ही मौसम में एक विचित्र-सा परिवर्तन आने लगता है।देह को सहलाती हुई हवा में मन धीरे-धीरे मचलने लगता है।आम के वृक्षों में मंजरियाँ फूटने लगती हैं।यह एक ऐसा मौसम है जिसमें रंग-बिरंगे फूल जगह-जगह खिले हुए दिखते हैं और उन्हें देख कर मन मोहित हुआ रहता है।नदियों,सरोवरों और झरनों में शुद्ध हवा शीतलता प्रदान करती है।कहना गलत न होगा कि वसंत ऋतु में हर ओर मस्ती-सी छा जाती है।पौराणिक काल में वसंत पंचमी को ‘मदनोत्सव’ के रूप में मनाने की परम्परा रही है।ब्रज क्षेत्र में आज ही के दिन से होलिकोत्सव का आरम्भ माना जाता […] - [उत्तर प्रदेश एवं राजनीति की दिशा](https://www.chubhan.today/uttar-pradesh-evam-rajniti/):        – अजय “आवारा” उत्तर प्रदेश एवं देश की राजनीति में दो रेखाएं हैं, जो कहने को तो दो रेखाएं हैं, परन्तु इन दोनों के अस्तित्व को अलग कर के नहीं देखा जा सकता। या यू कहें कि एक रेखा का अस्तित्व ही दूसरी रेखा के अस्तित्व पर आश्रित है। विचार योग्य बात यह है कि हमारे देश की राजनीति में ऐसा क्या है जो देश एवं प्रदेश की राजनीति को दिशा से भटका देता है। आखिर ऐसा क्या है, उत्तर प्रदेश की राजनीति में? क्या हम उत्तर प्रदेश में व्यक्ति की योग्यता या कार्यशैली को नकार देते […] - [स्वतंत्रता संग्राम का बिसरा पहलू](https://www.chubhan.today/swatantrata-sangram-ka-bisra-pahlu/):      – अजय “आवारा” अहिंसा की शिक्षा भारत के लिए कोई नई बात नहीं है।सिर्फ बौद्ध और जैन धर्म में ही नहीं, अहिंसा की महिमा उनसे पहले उपनिषदों में भी गाई गई थी।कहा जा सकता है कि अहिंसा भारत की सभ्यता का सार है।इसमें कोई संशय नहीं कि अहिंसा का उपदेश भारत में इतने दिनों से दिया जा रहा है कि विश्व में भारत को अहिंसा और निवृत्ति का देश माना जाने लगा। परन्तु इतना सब होते हुए भी, आधुनिक भारत में अहिंसा का प्रवर्तक महात्मा गांधी को ही माना जाता है। 30 जनवरी सन 1948 के दिन महात्मा […] - [देश भक्ति और भारतीयता](https://www.chubhan.today/deshbhakti-aur-bhartiyta/): आज गणतंत्र दिवस(26 जनवरी) की मेरे सभी पाठकों को बहुत बहुत शुभकामनाएं।आज का दिन हम सभी के लिए बहुत खास होता है, क्योंकि इसी दिन भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया था। किसी भी देश के लिए स्वतंत्रता का बहुत मूल्य होता है।वह स्वतंत्रता जो देश के लोगों को अपनी शर्तों पर जीने की सुविधा देती है, उन्हें वह करने का अवसर देती है, जो वे करना चाहते हैं, परंतु यह स्वतंत्रता उस समय बेमानी हो जाती है, जब राष्ट्र-जीवन के संचालन के लिए आवश्यक नियम भी नज़रअंदाज़ कर दिए जाएं। हमारे देश मे आजकल एक ऐसी सोच विकसित […] - [उर्दू अदब के मशहूर शायर : डॉ. नफ़स अम्बालवी](https://www.chubhan.today/urdu-adab-ke-mashhur-shayar/): आज 24 फरवरी 2022 को चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा अम्बाला के मशहूर शायर नफ़स अम्बालवी जी को उर्दू अदब की खिदमात और बकौल उर्दू अकादमी, आलातरीन अदबी मकाम हासिल करने के लिए साल 2020 के लिए “श्री सुरेन्द्र पंडित सोज़” सम्मान और ‘अकादमी अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। ‘चुभन’ की तरफ से आपको बहुत बहुत बधाई। सुप्रसिद्ध शायर नफ़स अम्बालवी जी आज हमारे पॉडकास्ट में आमंत्रित हैं, जिनका नाम तो कमलेश कौशिक है, लेकिन वे नफ़स अम्बालवी के नाम से ही जाने जाते हैं।आप पेशे से चिकित्सक हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति […] - [लोहड़ी दी लख-लख बधाइयाँ](https://www.chubhan.today/lohri-di-lakh-lakh-badhaoyan/): एक नहीं सैकड़ों देश-विदेश के महान लोगों के मुंह से मैंने सुना है कि भारत विविधता में एकता से भरा- पूरा देश है।हम सौभाग्यशाली हैं कि एक ऐसे देश के वासी हैं जहाँ हर पर्व मिलजुल कर विभिन्न तौर-तरीकों से और सबसे बड़ी बात कि ऋतु और मौसम के अनुसार मनाया जाता है इसलिए हमारे हर पर्व का एक वैज्ञानिक आधार होता है। आज लोहड़ी का पावन पर्व है और इसे हम प्रति वर्ष बड़े हर्षोल्लास से पौष माह के अंत और माघ महीने के आरम्भ में मनाते हैं।लोहड़ी का नाम सुनते ही मन में प्रसन्नता और उल्लास का जोश […] - [क्रांतिकारी व्यक्तित्व : डॉ. शीला डागा](https://www.chubhan.today/krantikari-vyaktitva/): “मैंने अपनी झोली में जितना संसार भरा था वह लौटा दिया है सारा लगता है नया जन्म हुआ है एक सूर्यवस्त्र लिपटा है मेरे चारों ओर हाथ में स्पर्श है किसी की पवित्रता का और आंख में महासागर के अतल जल का बोध- ठिठका है।” – सुप्रसिद्ध कवयित्री पद्मश्री डॉ. सुनीता जैन आज “चुभन” के पटल पर मुझे डॉ. शीला डागा जी से संवाद करने का अवसर मिला, सच में कुछ लोग जन्म लेते हैं और पूरा जीवन एक ही तरह से जी लेते हैं, लेकिन कुछ लोग इस जीवन में ही नया जन्म लेते हैं और एक ही जीवन […] - [2021 : क्या खोया क्या पाया](https://www.chubhan.today/2021kya-khoya-kya-paya/): गुजरता वक्त, कुछ अनुभव देकर जाता है, तो कुछ संकेत भी दे देता है। वहीं, आने वाला वक्त, अपने अंदर दफ्न कई राज़ लिए आता है। कल में कुछ संकेत छुपे होते हैं, कल के लिए। उस राज़ को समझने की, और उसके साथ चलने की क्षमता, हमें कल का अनुभव ही देता है। यूं लगता है कि गया वक्त, और आने वाला वक्त, एक दूसरे से अनजान तो हैं, फिर भी, उनकी कड़ी जुड़ी हुई होती है। तो आइए, पहचानते हैं इस कड़ी को। कुछ सीखते हैं 2021 से, और स्वागत करते हैं 2022 का। ऐसी शख्सियतों के साथ, […] - [कविताएं बोलतीं हैं](https://www.chubhan.today/kavitaen-bolti-hain/):               – अजय “आवारा” कोई तो लिखता है, कोई दिल से लिखता है, कोई सोच कर लिखता है, पर कोई, पागलपन में लिखता है। कोई सोच समझ कर लिखता है कोई सुनाने के लिए लिखता है कोई अपनी बात लिखता है पर कोई दिल की बात लिखता है। कोई साहित्य की बात लिखता है, कोई नियमों के आधार पर लिखता है, कोई ज्ञान के अर्थ लिखता है, पर कोई अंतर की आवाज लगता है। कोई गुरु तो कोई रहबर है, कोई संयोजक तो कोई आलोचक है, कोई आदर्श तो कोई समीक्षक है, पर कोई, […] - [अवस्थी से भिखारी तक](https://www.chubhan.today/awasthi-se-bhikhari-tak/): आज देश मे गोवंश की दशा बहुत अच्छी नहीं है।इन बेज़ुबानों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार क्यों ? जबकि गाय इस देश का धर्मशास्त्र है, कृषि शास्त्र है, अर्थशास्त्र है, नीति शास्त्र है, उद्योग शास्त्र है, समाज शास्त्र है, आरोग्य शास्त्र है, पर्यावरण शास्त्र है और अध्यात्म शास्त्र भी है। आज हम जिनसे मिलेंगे, वे हैं करुणा, दया और उदारता की प्रतिमूर्ति अखिलेश भिखारी जी।इस कलयुग में, जहां इंसान ही इंसान का दुश्मन बना हुआ है, उसी दौर में आप इंसानों के साथ ही बेजुबानों का दर्द भी बांट रहे हैं। अखिलेश जी ने अपना उपनाम भिखारी क्यों किया ?इसका भी […] - [सुभाषितों को जन-जन के मन तक पहुंचाते सहृदय कवि](https://www.chubhan.today/subhashiton-ko-jan-jan-ke-man/): डॉ. भावप्रकाश गांधी “सहृदय” सहायक प्राध्यापक-संस्कृत, सरकारी विनयन कॉलेज गांधीनगर, गुजरात। संस्कृत केवल भाषा नहीं है परंतु सत्य सनातन भारतीय संस्कृति की संवाहिका भी है । यह भाषा किसी न किसी रूप में विश्व के कोने कोने में व्याप्त है । संस्कृत साहित्य विश्व का सबसे समृद्ध साहित्य माना जाता है । यह साहित्य निर्माण की परंपरा वेद काल से लेकर अद्यावधि अनवरत रूप से इस धरा पर प्रवर्तित होती रही है उसमें भी गद्यकाव्य, महाकाव्य और नाट्यों की अधिकता संस्कृत की जीवंतता को द्योतित करता है । इस साहित्य निर्माण की परंपरा में कुछ काल में हमें एक वेग […] - [रंगमंच और सिनेमा की सशक्त अभिनेत्री : भाषा सुम्बली](https://www.chubhan.today/rangmanch-aur-cinema-ki-sashakt-abhinetri/): डॉ. अग्निशेखर की कविता से आरंभ समकालीन हिंदी कविता के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. अग्निशेखर जी की एक कविता से मैं आरम्भ करूँगी।पहले आप इस कविता को पढ़ें, फिर मैं बताती हूं कि आज की पोस्ट का आरंभ इस कविता से ही क्यों ? एक ललवाख का जन्म (बेटी भाषा सुम्बली के लिए) -अग्निशेखर भाषा सुम्बली: एक बहुमुखी कलाकार का परिचय प्रसूति गृह के बाहर मैं घड़ी की सुई की तरह कल्पनाओं में चक्कर काट रहा था अपने ही इर्द-गिर्द जैसे सामने से गुज़र रहा था स्मृतियों का दरियाई जुलूस फूलमालाओं, तोरणों से सजा और सौहार्द के पुलों के नीचे से […] - [मशहूर शायरा श्यामा सिंह सबा जी के साथ एक संवाद](https://www.chubhan.today/shyama-singh-saba/): भाषा हमारे मनोभावों की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है।यह किसी की जागीर नही होती।विभिन्नता में एकता हमारे देश की विशेषता है और इसी विभिन्नता में भाषा गत विभिन्नता भी आती है। हमारी मातृभाषा हिंदी है परंतु इस मां का ह्रदय इतना विशाल है कि यह हर भाषा को आलिंगन बद्ध करके अपने अन्तस् में समा लेती है।बस यही सम्बन्ध हिंदी और उर्दू में भी है। इतना ही नही समय समय पर हिंदी ने उर्दू भाषी रसखान, कबीर, रहीम इंशाअल्ला खां और मलिक मोहम्मद जायसी को अपने वात्सल्य की डोर से बांधा तो उर्दू ने भी बढ़कर हिंदी भाषी फ़िराक़ […] - [रूढ़ियों और परंपराओं को चुनौती देती शख़्सियत : शाबिस्ता बृजेश](https://www.chubhan.today/rudhiyon-aur-parampraon/): शांत लहरों को सुनामी में न परिवर्तित करें छोड़ दें यह ज़िद कि हम भी प्रेम परिभाषित करें…… सच में बहुत कठिन है, प्रेम को परिभाषित करना क्योंकि प्रेम के इतने रंग, इतने रूप होते हैं कि इसे सिर्फ अनुभव किया जा सकता है, शब्दों की सीमा में बांधना तो असंभव ही है। आज हमने ‘चुभन पॉडकास्ट’ पर जिनको आमंत्रित किया है, उनका व्यक्तित्व ऐसा है, जिसमें प्रेम के रंग भरे हुए हैं और इन रंगों में इतनी विविधता है कि आपने ऐसा कम ही देखा सुना होगा। बात उन्हीं की होती है, जिनमें कोई बात होती है।हमारी आज की […] - [साहित्यकार अग्निशेखर : एक बहुआयामी व्यक्तित्व](https://www.chubhan.today/sahitykar-agnishekhar/): सुम्बल, मेरे गांव! कैसे हो मैं तुम्हें सांस सांस करता हूं याद तुम्हारे बीचो बीच से होकर बहती वितस्ता मेरी शिराओं में बहती है मैं हर रोज़ तुम्हारे पुल से छलांग मारकर दूर तक तैरता रहता हूं तुम्हारे आंसुओं में। तुम्हारे उदास चिनारों पर हर शाम उतरती हैं ,मेरी नींद की चिड़ियां जो सपनों में आती हैं, पहाड़ उतरकर यहां, जम्मू के शरणार्थी कैंपों में और अपनी पीठ पर ले जाना चाहती हैं हमें अपने छूटे हुए घरों को। सुम्बल, मेरे गांव! आज मेरे बेटे ने तुम पर लिखी एक कविता जैसे जेल से एक क्रांतिकारी ने लिखा हो डायरी […] - [विजयादशमी का हमारे जीवन में व्यवहारिक महत्व](https://www.chubhan.today/vijayadashami-ka-hamare-jeewan/): विजयादशमी के पावन पर्व पर आप सभी को अनंत मंगलकामनाएं। इन पर्व-उत्सवों की जो उमंग पहले हुआ करती थी, वह अब उतनी नहीं रही।इन त्योहारों का स्वरूप लोकोन्मुखी नही रह गया है।आज जीवन में राम को लाने की आवश्यकता है तभी इन पर्वों को सही मायने में प्रासंगिक बनाया जा सकता है। हम सब जानते हैं कि नवरात्रि, दशहरा और दीपावली, इन सभी पर्वों का संबंध श्री राम से ही है।प्रभु श्री राम ने स्वयं को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में हमारे समक्ष प्रस्तुत किया और वे परब्रह्म राम न होकर मानव राम हैं, जो निरंतर संघर्षों से लड़ते रहते […] - [जनसत्ता बनाम राजनीति](https://www.chubhan.today/jansatta-banam-rajniti/): सारी दुनिया आशा और निराशा, तनाव और टकराव तथा आतंक एवं युद्ध के बीच झूल रही है। महाशक्तियां आणविक शस्त्रों की होड़ में सारे विश्व को दहशत के साथ जीने को मजबूर किए हुए हैं। ऐसा नहीं कि इन देशों की जनता के मन में यह दहशत न हो, बल्कि यह उनमें तो हम से भी अधिक है लेकिन उस दहशत के बावजूद उनके शस्त्रागारों में हथियारों की ऊंचाई आसमान से भी ऊंची हो रही है और अब अंतरिक्ष को भी इसने पार कर लेने की ठान ली है। एक सांख्यिकी विशेषज्ञ द्वारा कम्प्यूटर की सहायता से हुए सर्वेक्षण से […] - [महात्मा गाँधी:जीवन जीने की कला सिखाता एक व्यक्तित्व](https://www.chubhan.today/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95/): इन्सान के महान विचार कार्य रूप में परिणत हों तो वह कई कदम आगे निकल जाता है और इस बात को सबसे अधिक किसी ने साबित किया है तो वे हैं युगपुरुष महात्मा गाँधी।सदियों बाद ऐसे प्रभावशाली पुरुष का उदय होता है।2 अक्टूबर 1869 यानि आज के दिन ही गाँधी जी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।अहिंसा और सत्य को स्वाधीनता-संग्राम का हथियार बनाकर महात्मा गाँधी ने संसार के सभी पराधीन राष्ट्रों को अहिंसात्मक युद्ध का नया मार्ग दिखलाया,उनकी अन्य चमत्कारी उपलब्धियों में यह सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि थी।नवीन भारत के निर्माताओं में महात्मा गाँधी का नाम सबसे प्रथम आता […] - [धरती माँ के लाल-लाल बहादुर शास्त्री](https://www.chubhan.today/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0/): जैसे ही अक्टूबर माह लगता है वैसे ही मन गर्व से भर उठता है क्योंकि इसी माह की 2 तारीख को देश के दो महान सपूतों राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी दोनों का जन्मदिन होता है।इस अवसर पर आज मैं शास्त्री जी की कर्मठता,सादगी,ईमानदारी,सत्यनिष्ठा,शालीनता,वाक्पटुता आदि विशेषताओं की चर्चा भी आपके साथ करना चाहूंगी। लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित मुगलसराय में हुआ था।वे एक अद्वितीय देशभक्त,कुशल प्रशासक,उत्कृष्ट राजनेता और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति थे और विनम्रता तो उनमे कूट-कूट कर भरी हुई […] - [बिसरी भारतीयता - पॉडकास्ट](https://www.chubhan.today/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%a1%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f/):                              – अजय “आवारा” यह सच है कि हमारी संस्कृति अपने आप में आकाश है। पर हम अपनी संस्कृति से कितना जुड़े हुए हैं और कितना उसे भूल चुके हैं ? क्या हम भारतीयता को सही मायनों में जी रहे हैं ? कहीं ऐसा तो नहीं हो रहा है, कि हमारी भारतीयता कहीं खो गई है। बड़े अचरज की बात है कि, हमारे मूल रीति- रिवाज, पता नहीं कहां गुम हो गए। हमारे रीति-रिवाज, आज जिस रूप में हमारे सम्मुख हैं, जिनका हम अनुसरण कर रहे हैं, […] - [हिन्दी-दिवस - "चुभन पॉडकास्ट"](https://www.chubhan.today/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/): हिन्दी-दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आज हिंदी राजभाषा, संपर्क भाषा और जन भाषा के सोपानों को पार कर विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि हिन्दी-दिवस भी एक आयोजन और प्रतीक की तरह ही हर साल आता जाता न रहे, बल्कि ठोस कार्य करने होंगे और आजकल मैं देखती हूं कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो व्यक्तिगत स्तर पर ही हिंदी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। ऐसी ही एक संस्था “कलम” है जो अहिंदी भाषी क्षेत्रों और विदेशों में भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में […] - [कश्मीरी विस्थापितों की चुभन : सम्मानजनक वापसी](https://www.chubhan.today/kashmiri-visthapiton-ki-chubhan/): वक्त के बहाव में कभी-कभी सब कुछ बह जाता है, ढह जाता है और हम टूट कर, बिखर कर रह जाते हैं। ऐसे ही एक बहाव, एक तूफान ऐसा आया कि हमारे देश की संस्कृति का उद्गम स्थल, उसका मुकुट, भारत की शान कहे जाने वाले कश्मीर में ऐसा सब कुछ बदला कि खंडहर से ज्यादा अब वहां कुछ नजर आता ही नहीं, मातम-सा फैल गया है। इतना दर्द,इतनी वेदना का जहां साम्राज्य फैला हो, वहां के लोगों पर क्या बीती होगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है और इस दुख की पराकाष्ठा तो यह हुई कि कश्मीर के पंडितों […] - [आवारा की बातें](https://www.chubhan.today/awara-ki-batein-amrita-pritam/): अतीत का वर्तमान : अमृता प्रीतम                                   -अजय ‘आवारा’ अमृता प्रीतम जी की लेखनी के बारे में कुछ लिखना, किसी आम कलम के बूते की बात नहीं। अमृता प्रीतम वह लेखिका हैं, जिनकी कलम उन्हें सब से अलग खड़ा करती है। उनकी लेखनी में एक आम आदमी की जुबान बोलती है। उनकी लेखनी में समय के अनुसार परिवर्तन आता रहा है। रूमानियत से शुरू होकर, नारी का दर्द, बंटवारे का दर्द, एवं सामाजिक कुरीतियों पर उनकी कलम खूब चली है।अमृता प्रीतम सिर्फ हिन्दी की […] - ['संस्कृत दिन' है लेकिन दीन नहीं](https://www.chubhan.today/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%a8/): “भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा” अर्थात् संस्कृति का मूल संस्कृतभाषा है। संस्कृत भाषा ही भारतीय संस्कृति का आदिस्रोत है। संस्कृत भाषा में ही भारत के सांस्कृतिक विचार, उच्चादर्श और नैतिक मूल्य समाहित हैं। आज ‘संस्कृत दिवस’ है।इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।आज हम मिलेंगे डॉ. अमृतलाल गौरीशंकर भोगायता जी से, जो ब्रह्मर्षि संस्कृत महाविद्यालय नडियाड गुजरात में प्रधानाचार्य हैं।आपके द्वारा किये गए कार्य ही आपकी विद्वता प्रदर्शित करते हैं।आपने 7 काव्यग्रंथो की रचना की है।अन्योक्ति काव्य में आपकी बहुत रुचि है। 2 विवेचन ग्रंथ और 5 ग्रंथ प्रकाशनाधीन हैं।पुरस्कार और सम्मानों की बात की जाए तो आप राष्ट्रीय […] - [राष्ट्रवाद की आवाज़](https://www.chubhan.today/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a5%9b/):                 – अजय “आवारा” आज हमारी स्वतंत्रता का 75वां राष्ट्रीय पर्व है। 15 अगस्त, हमारे लिए तारीख मात्र नहीं, अपितु एक भावनात्मक जुड़ाव भी है। यह वह दिन है, जिस दिन हमको अपने भारतीय होने पर गर्व होता है। पर क्या, 15 अगस्त पर ही भारतीय होने का गर्व होना होना चाहिए? क्यों नहीं हमें हर पल गौरवान्वित होना चाहिए ? यह एक सवाल है, कि क्या, राष्ट्रीयता की भावना मात्र एक दिन के लिए बनी है ? इस वर्ष की विशेषता यह है कि यह हमारी 75 वीं वर्षगांठ है। आईए इस […] - [विश्व का एकमात्र अंक काव्य : सिरि भूवलय](https://www.chubhan.today/vishva-ka-ek-matr-ank-kavya/): – डॉ.स्वर्ण ज्योति   भाषा का परिचय – भाषा विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है। मानव का मानव से संपर्क माध्यम है भाषा। किंतु भाषा क्या है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई?मानव ध्वनि संकेतों के सहारे अपने भावों और विचारों की अभिव्यक्ति करने के लिए जिस माध्यम को अपनाता है उसे भाषा की संज्ञा दी जाती है। भाषा शब्द संस्कृत के भाष् धातु से निषपन्न हुआ है जिसका अर्थ है व्यक्त वाणी। भाषा की उत्पत्ति के संदर्भ में कई सिध्दांत प्रचलित हैं। भाषा की उत्पत्ति इतने प्राचीन काल में हुई कि उस पर विचार करने के लिए हमारे पास आज […] - [कश्मीरी पंडित : शरणार्थी अपने देश में](https://www.chubhan.today/kashmiri-pandit-sharnarthi-apne-desh-me/): जम्मू-कश्मीर में जो भी हुआ या हो रहा है, उसके बारे में हम सभी कुछ न कुछ जानते ही हैं परंतु यह भी अटल सत्य है कि जो भी परिस्थितियां बनीं और आज तक कायम हैं, उसमें हमारी भी गलतियां हैं।कश्मीर क्या था और क्या बन गया है, यह तो किसी से भी छुपा नहीं है। कश्मीर से अब तक लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर- बार छोड़ कर अलग-अलग स्थानों पर रहने को विवश हुए।उस समय हुए नरसंहार में सैकड़ों पंडितों का कत्लेआम हुआ।पाकिस्तान की सेना और आई एस आई ने मिलकर कश्मीर में दंगे कराए और यह सिलसिला आज […] ## Pages - [Terms and conditions](https://www.chubhan.today/terms-and-conditions/): Terms and Conditions Welcome to Chubhan.today. 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Words and emotions have always fascinated me, and I strongly believe that the right communication forms the foundation of every meaningful relationship. My study of literature opened doors to understanding the depth of human emotions, while my years of experience as an announcer at All India Radio taught me how to express ideas clearly and connect with people through voice and words. Over the years, I have written articles, poems, and stories for reputed magazines and newspapers—each piece reflecting […] - [Privacy Policy](https://www.chubhan.today/privacy-policy/): Privacy Policy for Chubhan Today Last Updated: 20/08/2025 At Chubhan Today (https://www.chubhan.today), your privacy is very important to us. This Privacy Policy explains what information we collect, how it is used, and how you can manage your choices. By using our website, you agree to the terms outlined below. 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