अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष:मंथन
महिला दिवस:उपासना नहीं सम्मान दो ðलिंक को क्लिक करें। द्वारा:अजय “आवारा” जी International Women’s Day special: Curtain Raiser आगामी […]
Your blog category
महिला दिवस:उपासना नहीं सम्मान दो ðलिंक को क्लिक करें। द्वारा:अजय “आवारा” जी International Women’s Day special: Curtain Raiser आगामी […]
लोग साहित्य लिखते हैं। गीत, कविता और कहानियां लिखते हैं। पर, क्या कोई दिल की बात लिखता है? क्या आपने
आप सब जानते ही हैं कि आजकल हमने मेजर जनरल अमिल कुमार शोरी जी की पुस्तक ‘Invisible Shades of Ramayana’
भाषा के चिंतन की सार्थकता सिर्फ संवाद मात्र से सिद्ध नहीं हो जाती। जब तक साहित्य के मंथन से भाषा
“कौन सी बात कहां,कैसे कही जाती है। यह सलीका हो तो ,हर बात सुनी जाती है।” प्रसिद्ध शायर वसीम बरेलवी
भाषा का महत्व उसके साहित्य से आंका जाता है। अगर हम यह कहें, कि वास्तव में साहित्य भाषा का श्रृंगार
यह एक कौतुहल भरा सवाल हो सकता है, कि विश्व की प्राचीनतम भाषा की सूची में कौन-कौन सी भाषाएं आती
” उसने फेंके मुझ पर पत्थर और मैं पानी की तरह और ऊंचा,और ऊंचा और ऊंचा उठ गया।” प्रसिद्ध कवि
विभिन्न काल के रूप में समय का बदलना अनिवार्य एवं स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसे हमारी मजबूरी समझिए या नियति। जो
साहित्य को हम देश काल या भाषा की हदों से नहीं बांध सकते।भाषा कोई भी हो,यदि सृजन अच्छा हुआ है
आप सभी को ,वैश्विक पटल पर हिंदी के विशेष उत्सव,’विश्व हिंदी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं। 10 जनवरी 2006 से इस
– मेजर जनरल ए.के. शोरी जी के शब्द वैश्विक महामारी कोरोना हमारे जीवन में अचानक ही नहीं आ गयी।वास्तव
“मैं अतीत को सिर्फ वर्तमान की प्रेरणा मानता हूं।सुनाने के लिए ज़्यादा कुछ भी नहीं है।मेरा मानना है कि अतीत
हेमंत में बहुधा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हंसता शरद का सोम है हो जाए
“समस्या एक मेरे सभ्य नगरों और ग्रामों में सभी मानव सुखी,सुंदर व शोषण मुक्त कब होंगे?” सुशासन की आस लगाए
जग पीड़ित है अति दुख से जग पीड़ित है अति सुख से मानव-जीवन में बंट जाए सुख-दुख से,दुख-सुख से। -सुमित्रा
हरिवंशराय बच्चन जी का जन्म आज ही के दिन यानि 27 नवंबर 1907 को प्रयाग (इलाहाबाद) के पास प्रतापगढ़ जिले
संत कवि कबीरदास, मलिक मोहम्मद जायसी,तुलसीदास,छायावाद के प्रवर्तक कवि जयशंकर प्रसाद और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी मेरे सबसे प्रिय कवि
कविवर #जयशंकर_प्रसाद साहित्य के उन अमर रचनाकारों में से एक हैं, जिन्होंने देवी सरस्वती के पावन मंदिर में अनेक श्रद्धा
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता के पिलर अर्णव गोस्वामी को आज जिस तरह माननीय सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली
“संस्कृतं नाम दैवी वाग् अन्वाख्याता महर्षिभिः”। महर्षियों ने संस्कृत को ‘देववाणी’ कहा है।ऐसी हमारी ‘देववाणी’ की आज क्या दशा है,
स्वर कोकिला,भारत रत्न लता मंगेशकर सिर्फ हमारी फिल्म इंडस्ट्री की एक महान गायिका ही नहीं अपितु सुरों की देवी हैं
हिंदी साहित्य के क्रांतिदर्शी कवि,अपनी कविता से हृदय को झकझोर देने वाले प्रमुख लेखक, कवि व निबंधकार आधुनिक युग के
” दिया क्यों जीवन का वरदान? इसमें है स्मृतियों का कंपन,सुप्त व्यथाओं का उन्मीलन, स्वप्नलोक की परियां इसमें,भूल गईं मुस्कान!
“हिम्मत करे इंसान तो क्या हो नहीं सकता वह कौन सा उक़दा है जो हो नहीं सकता तदबीर अगर चाहे
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। पंडित सोहनलाल द्विवेदी जी की यह
मेरे सभी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।इस बार जिस तरह से हमको यह दिवस मनाना पड़ रहा है,
मैंने अपने पॉडकास्ट के इस पहले एपिसोड में उसका परिचय दिया है।मेरे बहुत सारे पाठकों/श्रोताओं ने पॉडकास्ट(Podcast) का नाम सुना
जन्मभूमि के लिए प्रभु श्री राम का पांच सौ वर्षों का बनवास आज खत्म हो रहा है।पांच सदियों का यह
हमारी भारतीय संस्कृति इतनी विशाल है कि उसका प्रत्येक कार्य चाहे उपवास हो, पूजन हो, ध्यान हो अथवा सामाजिक कार्य