धरती माँ के लाल-लाल बहादुर शास्त्री
जैसे ही अक्टूबर माह लगता है वैसे ही मन गर्व से भर उठता है क्योंकि इसी माह की 2 तारीख […]
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जैसे ही अक्टूबर माह लगता है वैसे ही मन गर्व से भर उठता है क्योंकि इसी माह की 2 तारीख […]
हिन्दी-दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आज हिंदी राजभाषा, संपर्क भाषा और जन भाषा के सोपानों को पार कर
वक्त के बहाव में कभी-कभी सब कुछ बह जाता है, ढह जाता है और हम टूट कर, बिखर कर रह
“भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा” अर्थात् संस्कृति का मूल संस्कृतभाषा है। संस्कृत भाषा ही भारतीय संस्कृति का आदिस्रोत है। संस्कृत
– डॉ.स्वर्ण ज्योति भाषा का परिचय – भाषा विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है। मानव का मानव से
जम्मू-कश्मीर में जो भी हुआ या हो रहा है, उसके बारे में हम सभी कुछ न कुछ जानते ही हैं
लेखक – डॉ. भावप्रकाश गांधी “सहृदय” सहायक प्राध्यापक -संस्कृत, सरकारी विनयन कॉलेज गांधीनगर, गुजरात मनुष्य अपने मनोभावों को अभिव्यक्त करने
“ये माना ज़िंदगी है चार दिन की बहुत होते हैं यारों चार दिन भी।” -फिराक़ गोरखपुरी वास्तव में ज़िंदगी होती
“अंत में मित्रों इतना ही कहूंगा कि अंत महज़ एक मुहावरा है जिसे शब्द हमेशा अपने विस्फोट से उड़ा देते
“लाई हयात, आए, क़ज़ा ले चली, चले अपनी खुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले बेहतर तो है यही कि
“वह ऊष्मा है ऊर्जा है प्रकृति है पृथ्वी है क्योंकि – वही तो आधी दुनिया और पूरी स्त्री है।” -डॉ.
दोस्तों, हम सभी कभी न कभी ऐसा महसूस करते ही हैं कि हम अपने उद्गार कहीं व्यक्त नहीं कर पा
“अमृत कलश तो देवता लेकर चले गए विष ज़िंदगी का जो बचा सारा मिला हमें। ये आग, ये धुंआ, ये
Telugu Sahitya Vimarsh तेलुगु भाषा का अस्तित्व कब से आरंभ हुआ, इस दिशा में जो अनुसंधान हुए हैं, वे पर्याप्त
साहित्य से दूरी हमें कहाँ ले जा रही ? ðलिंक क्लिक कर इस रोचक लेख को भी अवश्य पढ़ें। बीता
“शब्द गूंगे हो गए हैं अर्थ बहरे हो गए हैं, वक़्त की हाराकिरी में घाव गहरे हो गए हैं।” –
हर तरफ कैसा कोहराम, कैसा मातम छाया हुआ है?हर चीज़ अपनी जगह पर स्थिर हो गयी है।कुदरत भी मानो रो
हमारे देश के विभिन्न भागों में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं।भाषाओं
आज मन इतना व्यथित है कि शब्द मानो गूंगे हो गए हैं।क्या लिखूं समझ नहीं पा रही ?सुबह होते ही
“सिर नीचा कर किसकी सत्ता,सब करते स्वीकार यहां। सदा मौन हो प्रवचन करते, जिसका वह अस्तित्व कहां ?”
जैसा कि हम लोग जानते ही हैं कि आजकल चुभन पर मेजर जनरल अमिल कुमार शोरी जी वाल्मीकि रामायण के
नारी स्वतंत्रता-प्रश्नचिन्ह ðकुछ ‘चुभते’प्रश्नों के लिए इस लेख को पढ़ें। अजय “आवारा” जी एक और महिला दिवस (Women’s Day) का
International Women’s Day Special:Part-4 परंपरा एवं आधुनिकता का सशक्त हस्ताक्षर-डॉ. शशि तिवारी जी आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day)
महिला दिवस मनाने की सार्थकता ðयहां क्लिक कर, इस लेख को अवश्य पढ़ें। International Women’s Day महिला उत्पीड़न एवं सामाजिक
International Women’s Day Special:part 2 मेजर जनरल ए.के. शोरी जी की पुस्तक Invisible Shades of Ramayana पर एक संवाद
International Women’s Day Special:part 1 महिला अधिकारों की बुलंद आवाज़ आज महिला दिवस (Women’s Day) के अवसर पर प्रसिद्ध कवयित्री